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बुधवार, 27 अक्टूबर 2021

chapter -14 प्रकाश किसे कहते हैं ,

 chapter -14  

प्रकाश

प्रकाश एक ऐसी बाहृय कारक है, जो किसी वस्तु को देखने में हमें सहायता करती।
👉 प्रकाश एक अनुप्रस्थ तरंग है।
👉 प्रकाश का तरंग दैध्यर्य 3900A°-7800 A°होती है।
👉 सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक आने में 8.3 मिनट/8 मिनट 19 सेकंड का समय लगता है।
👉 चंद्रमा के प्रकाश को पृथ्वी तक आने में 1.3मिनट/1मिनट 29 sec का समय लगता है।
👉 प्रकाश की चाल को सबसे पहले रोमर ने मापा था।
👉 प्रकाश की चाल
निर्वात-3×10 8min/sec
पानी -2.25×10 8m/sec
कांच-2×10 8m/sec
👉 प्रकाश सात रंगों से बनी है यह सबसे पहले न्यूटन ने कहा था।
👉 प्रकाश के तरंग सिद्धांत को आइजेन्स ने दिया था।
👉 प्रकाश के व्यतिकरण का सिद्धांत को थामस यंग ने दिया था।
👉 लाल रंग का तरंग धैर्य सबसे अधिक होता है। तथा बैंगनी रंग का तरंग धैर्य सबसे कम होता है

प्रकाश का प्रकीर्णन-

जब प्रकाश किसी माध्यम से होकर गुजरती है तो माध्यम में उपस्थित धूल कण की उपस्थिति के कारण प्रकाश सभी दिशाओं में फैल जाती है इस घटना को प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं।

रेले का अनुसार-

प्रकाश का ~तरंग धैर्य
👉 प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण आकाश नीला दिखाई देता है।

प्रकाश का परावर्तन-

जब प्रकाश की किरण किसी चिकनी सतह पर गिरती है, तो गिरने के बाद उसी माध्यम में वापस चली जाती है। प्रकाश की इस घटना को प्रकाश का परिवर्तन करते हैं।

👉 जब प्रकाश अभिलंब में गिरती है तो परावर्तन कोण का मान शुन्य होता है।

समतल दर्पण-

👉 समतल दर्पण में बना प्रतिबिंब हमेशा आभासी सीधा और वस्तु के आकार का होता है।
👉 यदि कोई व्यक्ति समतल दर्पण की ओर v वेग
से आता है,तो प्रतिबिंब 2v वेग से बनता है।

👉 किसी व्यक्ति को समतल दर्पण में अपना पूरा प्रतिबिंब देखने के लिए दर्पण की ऊंचाई मनुष्य की ऊंचाई से आधी होनी चाहिए।
👉 जब दो समतल दर्पण को ¢कोण में झुकाकर   रखी जाती है तो प्रतिबिंब की संख्या 360/¢-1 होगी।
👉 यदि दो समतल दर्पण को 90 डिग्री में रखा जाए तो प्रतिबिंब की संख्या360/90-1
=4-1= 3
👉 जब दो समतल दर्पण को समांतर में रखी जाती है तो प्रतिबिंब की संख्या अनंत होगी

समतल दर्पण का उपयोग-

1. आइने के रूप में
2. पेरिस्कोप के रूप में

गोलीय दर्पण-

गोलीय दर्पण दो प्रकार के होती है
1. उत्तल दर्पण
2. अवतल दर्पण

अवतल दर्पण में बना प्रतिबिंब

वस्तु की स्थिति - प्रतिबिंब की स्थिति- प्रतिबिंब की प्रहति
अनंत।             -   फोकस पर।            वास्तविक ,उल्टा   
              

उपयोग-

1.सोलर कुकर में
2.कान और दांत के डॉक्टर
3. हजामती दर्पण के रूप म
4.गाड़ी के हेडलाइट में

उत्तल दर्पण में बना प्रतिबिम्ब-

उत्तल दर्पण में वस्तु को किसी भी स्थान में रखने पर उसका प्रतिबिंब दर्पण के पीछे फोकस और पैल के बीच
बनता है तथा प्रतिबिंब की प्रकृति आभासी सीधा और वस्तु से छोटा बनता है।

उपयोग-
1.गाड़ी का मोटर कार के साइड मिरर के रूप में।
2.परावर्तक लेंम्पो में

दर्पण सूत  1/f=1/v+1/u

👉 फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है।

आवर्धन-

प्रतिबिंब की ऊंचाई और वस्तु की ऊंचाई की अनुपात और आवर्धन- करते हैं।

प्रकाश का अपवर्तन-

जब प्रकाश किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाती है तो अभिलंब की ओर मुड़ जाती है या अभिलंब से दूर चली जाती है प्रकाश के इस गुण को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।
जब किरण विरल माध्यम से संघन मध्यम में जाती है तो किरण अभिलंब की ओर मुड़ जाती है और जब किरण संघन माध्यम से विरल माध्यम में जाती है तब वह अभिलंब से दूर चली जाती है।

अपवर्तन के नियम-

1.आपतित किरण अपवतित किरण एवं आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब तीनों एक ही तल में होता है।
2. आपतन कोण की sin i एवं अपवर्तन कोण की sin r का अनुपात 1 स्थिरांक होता है।

लेंस-

लेंस दो प्रकार का होता है
1.उत्तल लेंस
2. अवतल लेंस

उत्तल लेंस-

इसका बीच का भाग मोटा तथा किनारे का भाग पतला होता है।

अवतल लेंस-

इसका बीच का भाग पतला तथा किनारे का भाग मोटा होता है।

लेंस की छमता-

किसी लेंस की फोकस दूरी के व्युत्क्रम को लेंस की क्षमता कहते हैं।
p=l/f
👉 लेंस की क्षमता का एस आई मात्रक डाइआप्टर होता है।

अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब-

इसमें बना प्रतिबिंब काल्पनिक सीधा और वस्तु से छोटा होता है जब प्रतिबिंब लेंस तथा फोकस के बीच स्थित होता है।

प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन-

जब कोई प्रकाश की किरण किसी संघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है तो अपवर्तन के कारण अपवतित किरण अपने लंब से दूर होती जाती है ऐसी स्थिति में अपवतित किरणे परावर्तन के बाद उसी माध्यम में भी परिवर्तित हो जाती है इसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं।
जैसे-
1.हीरा का अधिक चमकना
2.रेगिस्तान या ठंड प्रदेशों में मरीचिका का दिखाई देना।
3.कांच का चटका हुआ भाग का अधिक चमकना
4.पानी में पड़ी हुई परखनली का अधिक चमकना।
5.पानी में हवा भरी बुलबुले का चमकना

प्रकाश का व्यतिकरण-

जब समान अवॢति के दो प्रकाश किरणे एक साथ किसी दिशा में पहुंचते हैं तो उसी आवृति में वृद्धि हो जाती है उसे प्रकाश का व्यतिकरण कहते हैं।
जैसे-
1. पानी की सतह पर छडका तेल चमकने लगता है।
2. साबुन के बुलबुले चमकने लगते हैं।
👉 ध्वनि में ध्रवण का गुण नहीं पाया जाता है लेकिन प्रकाश में ध्रुवण का गुण पाया जाता है।


chapter -14 प्रकाश किसे कहते हैं ,

  chapter -14   प्रकाश प्रकाश एक ऐसी बाहृय कारक है, जो किसी वस्तु को देखने में हमें सहायता करती। 👉 प्रकाश एक अनुप्रस्थ तरंग है। 👉 प्रकाश क...