Chapter 9
सरल आवर्त गति.( Simple Harmonic motion)
आवर्त गति- (Periodic motion)
जब कोई वस्तु एक सरल रेखा में इस प्रकार से गति करता हो की वस्तु माध्यम स्थिति से जितना विस्थापन करना है उसमें उतना त्वरण उत्पन्न होता है तो उसे सरल आवर्त गति करते हैं।
👉 जब वस्तु माध्यम स्थिति से गुजरती है तो
बल (f)= o
त्वरण (a)=o
वेग(v) =अधिकतम
गति ऊर्जा(kE)=अधिकतम
स्थितिज ऊर्जा(pE)=०
👉 जब वस्तु अंतिम बिंदु से गुजरता है तो
बल (f)= अधिकतम
त्वरण (a)=अधिकतम
वेग(v) =०
गति ऊर्जा(kE)=०
स्थितिज ऊर्जा(pE)=अधिकतम
सरल लोलक-(Simple pendulum)
जब किसी भारहीन वह लंबाई न बढ़ने वाली डोरी( रस्सी) के एक सिरे में भारी लोलक को बांधकर किसी दृढ़ सतह पर लटकाते है, तो इस संयोजक को सरल लोलक कहते हैं।
👉 आवर्तकाल T=1/n n=आवृत्ति
👉 आवृत्ति n=1/T इसका मात्रक-Hz
👉 सरल लोलक का आवर्तकाल (T)=2π✓l/g
L=लोलक की लंबाई
G=गुरुत्व त्वरण
T~✓l=इसका अर्थ है लंबाई बढ़ने पर आवर्तकाल बढ़ता है।
👉जब कोई लड़की झूला झूलती है और झूलते समय खड़ी हो जाती है तब उसका आवर्तकाल घट जाएगा तथा झूला जल्दी-जल्दी दोलन करेगी।
👉 यदि कोई लड़की झूला झूल रही हो और बगल में कोई दूसरी लड़की आकर बैठ जाए तो झूले के आवर्तकाल में कोई परिवर्तन नहीं होगा।
👉 किसी लोलक घड़ी को चंद्रमा पर ले जाने पर उसका आवर्तकाल बढ़ जाएगा तथा घड़ी सुस्त हो जाएगी।
👉 लोलक घड़ी को अंतरिक्ष पर ले जाने पर काम नहीं करेगी क्योंकि अंतरिक्ष में g का मान जीरो(०) होता है।
👉 गर्मी के मौसम में आवर्तकाल बढ़ जाता है जिसके कारण घड़ी सुस्त हो जाती है।
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