Chapter 8
श्यानता (viscosity)
द्रव या गैस की 2 सतह के बीच एक बल कार्य करता है जो उसका अपेक्षित गति का विरोध करता है उसे श्यानता कहते हैं।
👉 श्यानता का मात्रक पास्कल सेकंड होता है।
👉 इसे ईऺटा द्वारा सूचित किया जाता है।
RRB JE /ASM/ TA/CA/ALP /NTPC/JSSC/ Group -D/SSC/BANKS/RPF Constable/Sl paramedical प्रतियोगी परीक्षाथियों के लिए COMPLETE NOTES
Chapter 8
द्रव या गैस की 2 सतह के बीच एक बल कार्य करता है जो उसका अपेक्षित गति का विरोध करता है उसे श्यानता कहते हैं।
👉 श्यानता का मात्रक पास्कल सेकंड होता है।
👉 इसे ईऺटा द्वारा सूचित किया जाता है।
Chapter -7
T=F/L
👉 इस का एसआई मात्रक N/M होता है।
👉 द्रव को गर्म करने पर उसका पृष्ठ तनाव कम हो जाता है। तथा क्रांतिक ताप(- 273°C)पर शून्य हो जाता है।
जैसे:-
1.वर्षा की बूंदे गोलाकार होना।
2.सेविंग ब्रश को पानी में डालने पर फैल जाता है तथा बाहर निकालने सिकुड़ जाता है।
3.साबुन या डिटर्जेंट गंदे कपड़े को साफ कर देता है।
4.गर्म सूप स्वादिष्ट लगते हैं।
👉 ठोसों में ससजक बल का माप सबसे अधिक होता है।
दो भिन्न-भिन्न पदार्थ के अणुओं के बीच लगने वाला बल को आसंजक बल कहते हैं।
जैसे:-
ब्लैक बोर्ड में चौक से लिखने से अक्षर उभर जाते हैं, तथा पानी गिलास को भीगोता होता है।
👉केशिकत्व नली में द्रव के ऊपर चढने या नीचे उतरने की घटना को केशिकत्व कहते हैं।
👉जो द्रव ग्लास को भिगोता है,वह केशनली म उपर चढ़ता है।
जैसे:- पानी
👉जो द्रव ग्लास भी नहीं भिगोता है वह केशनली में नीचे उतरता है।
जैसे:-
पारा
1. लालटेन या लैंम्प में तेल का ऊपर चढ़ना।
2.ब्लाटिग पेपर का स्याही को भोगना।
ब्रह्मण्ड मैं प्रत्येक वस्तु में एक प्रकार का आकर्षण बल लगता है, जो दूसरे वस्तु को अपने और आकर्षित करता है उसे गुरुत्वाकर्षण कहते हैं।
*गुरुत्वाकर्षण का नियम को न्यूटन ने दिया था।
किन्हीं दो वस्तुओं के बीच लगने वाला आकर्षण बल वस्तुओं के द्रव्यमान के गुणनफल के समानुपाती होता है तथा दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
m1_____r______m2
f£m1m2______(1)
f£.1/r²________(2)
f£m1m2/r²
F=Gm1m2/r²
G=6.67×10-¹¹Nm²/kg²
👉 गुरुत्व त्वरण-
गुरुत्व बल के कारण जो त्वरण उत्पन्न होता है उसे गुरुत्व त्वरण करते हैं।
g=G me/Re²
g=9.8m/s²
me=5.98×10²⁴kg(mass of earth)
Re=6.38×10 ६ m(radius of earth)
G के मान में परिवर्तन
👉 विश्वत रेखा में जी का मान सबसे कम होता है।
👉 ध्रुवा में जी का मान सबसे अधिक होता है।
👉समुद्र तल से ऊपर या नीचे जाने पर gका मान घटता है।
👉यदि पृथ्वी का घूर्णन गति बढ़ता है तो g का मान घटेगा।
👉यदि पृथ्वी का घूर्णन गति घटता है तो g का मान बढ़ेगा।
👉चंद्रमा पर किसी वस्तु का भार पृथ्वी पर के भार का 1/6 होता है ।
👉पृथ्वी की तुलना में चंद्रमा का द्रव्यमान1/81 होता है।
👉पृथ्वी के केंद्र में जी का मान 0होता है।
👉जब लिफ्ट त्वरित गति से ऊपर की ओर जाता है तो व्यक्ति को अपना भार बढ़ा हुआ महसूस होता है।
👉जब लिफ्ट त्वरित गति से नीचे की ओर आता है तो व्यक्ति का भार में कमी महसूस होता है।
👉जब लिफ्ट एक समान वेग से ऊपर या नीचे जाता है तो उसके भार में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
👉यदि लिफ्ट का त्वरण गुरुत्व त्वरण से अधिक होता है तो उस में खड़ा व्यक्ति फर्श से उठकर छत पर जा ने लगेगा।
👉यदि लिफ्ट के नीचे उतरते समय डोरी टूट जाए तो व्यक्ति का भार में कमी महसूस होगा।
कृतिम उपग्रह दो प्रकार के होते हैं।
1. कक्षीय उपग्रह
2.भू-स्थिर उपग्रह
कक्षीय उपग्रह का वेग8 km/sहोता है ।
👉कक्षीय उपग्रह का परिक्रमण काल84min होता है।
👉 यह ऊंचाई पर निर्भर करती है, अर्थात पृथ्वी के निकट चक्कर लगाने वाले उपग्रह का वेग अधिक होता है।
👉 यह द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है, एक ही कक्षा में उपस्थित जिन भिन्न-भिन्न द्रव्यमान वाले उपग्रह का वेग समान होगा।
कक्षीय वेगv0=√G me/Re+h(orbital velocity)
वैसे उपग्रह जो पृथ्वी का एक चक्कर 24 घंटा में पूरा करता है उसे भूस्थिर उपग्रह करते हैं।
👉 पृथ्वी तल से उसकी ऊंचाई36000 होती है।
वह न्यूनतम वेग जिसमें किसी वस्तु को ऊपर की ओर फेंकने पर वह गुरुत्व क्षेत्र को पार कर जाता है जिसे पृथ्वी पर वापस नहीं आता है उस न्यूनतम वेग को पलायन वेग करते हैं।
VE=√²gRe
👉पृथ्वी के लिए पलायन वेग का मान11.2km/s होता है।
👉चंद्रमा के लिए पलायन वेग का मान2.37 km/sहोता है।
👉सौर मंडल के लिए पलायन वेग का मान 42km/sहोता। है।
👉यदि किसी उपग्रह का कक्षीय वेग को√2×41% बढ़ा दी जाए तो वह उपग्रह अपनी कक्षा से पलायन कर लेगी
chapter -5
१. गतिज ऊर्जा
२. स्थितिज ऊर्जा
👉 ऊर्जा का विमीय सूत्र [ML²T-²]
जैसे :-
दौड़ता बालक
किसी वस्तु में उसकी स्थिति के कारण जो कार्य उत्पन्न होती है उसे स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
जैसे:-
खींचा हुआ धनुष में संचित ऊर्जा
चाबी वाली घड़ी में संचित ऊर्जा
तलाब में जमा हुआ पानी
स्थितिज ऊर्जा =mgh
गतिज ऊर्जा=½mv²
👉 जब किसी वस्तु का वेग दोगुनी कर दिया जाए तो (k) गतिज ऊर्जा ( 4 गुनी) हो जाएगी तथा वेग को आधी करने पर गतिज ऊर्जा एक चौथाई हो जाएगी।
👉 गतिज ऊर्जा और संवेग में संबंध
गतिज ऊर्जा k.E=½mv²
=mv²/2×m/m
=m²v²/2m(p=mv)
K.E=p²/2m
👉यदि किसी वस्तु का संवेग दोगुनी कर दिया जाए तो उसकी गतिज ऊर्जा 4 गुनी हो जाएगी।
👉किसी वस्तु का संवेग और वेग के अनुपात से (द्रव्यमान) मिलता है।
P=mv
mv/v=m
=संवेग/वेग
👉 ऊर्जा का SI मात्रक जूल(J)
P=w/t
=J/sec
👉 शक्ति का SI मात्रक जूल/ सेकंड होता है।
इसे watt से मापी जाती है।
👉 मशीनों की शक्ति को अश्वशक्ति से मापी जाती है।
1H.P=746 watt
शक्ति का विमीय सूत्र=[ML²T-³]
W=F×D
F=m.a
=[m].[LT-²]
=[MLT-²]
Chapter- 4
सरल मशीन:-- सरल मशीन एक ऐसी युक्ति है जो हमारे कार्य को सुविधाजनक बनाने में सहायता करती है।
👉 यह बल -आघूर्ण के सिद्धांत पर कार्य करता है।
जैसे:-
उत्तोलक ( Lever)
गिरनी (pulley)
आनत तल(Inclined plane)
स्क्रु जैक(screw jack)
मशीन की दक्षता=मशीन द्वारा किया गया कार्य/मशीन को दी गई ऊर्जा *100
👉 मशीन की दक्षता कभी भी 100% नहीं हो सकती।
उत्तोलक के 3 मुख्य भाग हैं:-
1. आल॑ब(fulcrum)
2. आयास(effort)
3. भार(load)
१.प्रथम श्रेणी के उत्तोलक(1st class Lever)
२.द्वितीय श्रेणी के उत्तोलक (2nd class Lever)
३.तृतीय श्रेणी क उत्तोलके (3rd class Lever)
यांत्रिक लाभ=भार/आयास
भार *भार भुजा=आयास*आयास भुूजा
यांत्रिक लाभ=आयास भुजा/भार भुजा
👉प्रथम श्रेणी उत्तोलक का यांत्रिक लाभ हमेशा एक के बराबर, एक से कम या एक से अधिक हो सकता है।
जैसे:-
तराजू ,कैंची ,प्लास, साइकिल का ब्रेक आदि।
यांत्रिक लाभ= आयास भुजा/भार भुजा
👉 द्वितीय श्रेणी उत्तोलक का यांत्रिक लाभ हमेशा एक से अधिक होता है।
जैसे:-
सरोता
ठेला गाड़ी आदि।
यांत्रिक लाभ =आयास भुजा /भार भुजा
👉तृतीय श्रेणी उत्तोलक का यांत्रिक लाभ हमेशा एक से कम होता है।
जैसे:-
मनुष्य का हाथ
चिमटा
मछली पकड़ने का डंन्टा आदि।
आवेग=बल*समय अन्तराल
S I मात्रक न्यूटन sec होता है ा part-2
सदिश राशि ा
वीमय सूत्र[ M L T -1 ]
जैसे :-
*क्रिकेट खलाड़ी बोल को कैच करने के बाद अपने हाथों को नीचे कि और खीचते हैं ा
*गाड़िया मे झटका को कम करने के लिए स्प्रिंग का प्रोयग किया जाता हैं ा
जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ मे घूमती हैं ,तो केंद्र की और लगने वाला को अभिकेन्द्रीय बल कहते हैं ा
जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ में घूमती है तो केंद्र से बाहर की ओर लगने वाला बल को अपकेंद्रीय बल कहते हैं।
*दूध से क्रीम निकालने के लिए अपकेंद्र बल का प्रयोग किया जाता है।
जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ में घूमती है तो 1 सेकंड में वृत्त के केंद्र के साथ जो कोण बनाता है कोणीय वेग कहलाता है।
कोणीय वेग=w=q/t
कोनिया वेग का मात्रक रेडियन सेकंड होता है।
रेखय वेग=कोणीय वेग*त्रिज्या
जब किसी वस्तु को किसी अक्ष के परिता घुमाया जाता है तो उसमें लगने वाला बल और लंबवत दूरी के गुणनफल को बल आघूर्ण कहते हैं।
T=f*d
👉एस आई मात्रक न्यूटन मीटर होता है।
👉सी ०जी ॰एस॰ मात्रक डायन सेंटीमीटर।
👉सदिश राशि।
👉विमीय सूत्र[ML²T-²]
chapter -14 प्रकाश प्रकाश एक ऐसी बाहृय कारक है, जो किसी वस्तु को देखने में हमें सहायता करती। 👉 प्रकाश एक अनुप्रस्थ तरंग है। 👉 प्रकाश क...