सोमवार, 11 अक्टूबर 2021

Chapter 9 सरल आवर्त गति.( Simple Harmonic motion),आवर्त गति- (Periodic motion),सरल लोलक-(Simple pendulum)

 

Chapter 9

             सरल आवर्त गति.( Simple Harmonic motion)

आवर्त गति- (Periodic motion)

जब कोई वस्तु एक सरल रेखा में इस प्रकार से गति करता हो की वस्तु माध्यम स्थिति से जितना विस्थापन करना है उसमें उतना त्वरण उत्पन्न होता है तो उसे सरल आवर्त गति करते हैं।

👉 जब वस्तु माध्यम स्थिति से गुजरती है तो
बल (f)= o
त्वरण (a)=o
वेग(v) =अधिकतम
गति ऊर्जा(kE)=अधिकतम
स्थितिज ऊर्जा(pE)=०

👉 जब वस्तु अंतिम बिंदु से गुजरता है तो
बल (f)= अधिकतम
त्वरण (a)=अधिकतम
वेग(v) =०
गति ऊर्जा(kE)=०
स्थितिज ऊर्जा(pE)=अधिकतम

सरल लोलक-(Simple pendulum)

जब किसी भारहीन वह लंबाई न बढ़ने वाली डोरी( रस्सी) के एक सिरे में भारी लोलक को बांधकर किसी दृढ़ सतह पर लटकाते है, तो इस संयोजक को सरल लोलक कहते हैं।

👉 आवर्तकाल T=1/n  n=आवृत्ति

👉 आवृत्ति n=1/T  इसका मात्रक-Hz

👉 सरल लोलक का आवर्तकाल (T)=2π✓l/g
L=लोलक की लंबाई
G=गुरुत्व त्वरण

T~✓l=इसका अर्थ है लंबाई बढ़ने पर आवर्तकाल बढ़ता है।

👉जब कोई लड़की झूला झूलती है और झूलते समय खड़ी हो जाती है तब उसका आवर्तकाल घट जाएगा तथा झूला जल्दी-जल्दी दोलन करेगी।

👉 यदि कोई लड़की झूला झूल रही हो और बगल में कोई दूसरी लड़की आकर बैठ जाए तो झूले के आवर्तकाल में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

👉 किसी लोलक घड़ी को चंद्रमा पर ले जाने पर उसका आवर्तकाल बढ़ जाएगा तथा घड़ी सुस्त हो जाएगी।

👉 लोलक घड़ी को अंतरिक्ष पर ले जाने पर काम नहीं करेगी क्योंकि अंतरिक्ष में  g का मान जीरो(०) होता है।

👉 गर्मी के मौसम में आवर्तकाल बढ़ जाता है जिसके कारण घड़ी सुस्त हो जाती है।


Chapter 8 श्यानता (viscosity)

 

Chapter 8

                श्यानता (viscosity)

द्रव या गैस की 2 सतह के बीच एक बल कार्य करता है जो उसका अपेक्षित गति का विरोध करता है उसे श्यानता कहते हैं।

👉 श्यानता का मात्रक पास्कल सेकंड होता है।
👉 इसे ईऺटा द्वारा सूचित किया जाता है।


शुक्रवार, 8 अक्टूबर 2021

Chapter -7 पृष्ठ तनाव (Surface Tension) physics

 

Chapter -7

     पृष्ठ तनाव (Surface Tension)
पृष्ठ तनाव:-द्रव का स्वतंत्र सत्ताह हमेशा तनाव में रहता है तथा कम से कम क्षेत्रफल घेरने की प्रवृत्ति होती है इससे पृष्ठ तनाव कहते हैं।

                   T=F/L
👉 इस का एसआई मात्रक N/M होता है।
👉 द्रव को गर्म करने पर उसका पृष्ठ तनाव कम हो जाता है। तथा क्रांतिक ताप(- 273°C)पर शून्य हो जाता है।

जैसे:-
1.वर्षा की बूंदे गोलाकार होना।

2.सेविंग ब्रश को पानी में डालने पर फैल जाता है तथा बाहर निकालने सिकुड़ जाता है।

3.साबुन या डिटर्जेंट गंदे कपड़े को साफ कर देता है।

4.गर्म सूप स्वादिष्ट लगते हैं।

ससंजक बल(Cnesive force)

एक ही पदार्थ के अणुओं के बीच लगने वाला बल ससंजक बल कहलाता है।


👉 ठोसों में ससजक बल का माप सबसे अधिक होता है।

आसंजक बल(Adhesive force)

दो भिन्न-भिन्न पदार्थ के अणुओं के बीच लगने वाला बल को आसंजक बल कहते हैं।

जैसे:-
ब्लैक बोर्ड में चौक से लिखने से अक्षर उभर जाते हैं, तथा पानी गिलास को भीगोता होता है।

केशिकत्व(Capillarity)

👉केशिकत्व नली में द्रव के ऊपर चढने या नीचे उतरने की घटना को केशिकत्व कहते हैं।

👉जो द्रव ग्लास को भिगोता है,वह केशनली म उपर चढ़ता है।


जैसे:- पानी

👉जो द्रव ग्लास भी नहीं भिगोता है वह केशनली में नीचे उतरता है।


जैसे:-
पारा

1. लालटेन या लैंम्प  में तेल का ऊपर चढ़ना।
2.ब्लाटिग  पेपर का स्याही को भोगना।

बुधवार, 6 अक्टूबर 2021

chapter -6 गुरुत्वाकर्षण (Gravitation)

 

chapter -6


गुरुत्वाकर्षण (Gravitation)

ब्रह्मण्ड मैं प्रत्येक वस्तु में एक प्रकार का  आकर्षण बल लगता है, जो दूसरे वस्तु को अपने और आकर्षित करता है उसे गुरुत्वाकर्षण कहते हैं।

*गुरुत्वाकर्षण का नियम को न्यूटन ने दिया था।

गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम

किन्हीं दो वस्तुओं के बीच लगने वाला आकर्षण बल वस्तुओं के द्रव्यमान के गुणनफल के समानुपाती होता है तथा  दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

m1_____r______m2
f£m1m2______(1)
f£.1/r²________(2)
f£m1m2/r²
F=Gm1m2/r²
G=6.67×10-¹¹Nm²/kg²

👉गुरुत्व बल -

पृथ्वी जिस बल से किसी वस्तु को अपने केंद्र की ओर खींचती है उसे गुरुत्व बल करते हैं।

👉 गुरुत्व त्वरण-
गुरुत्व बल के कारण जो त्वरण उत्पन्न होता है उसे गुरुत्व त्वरण करते हैं।

g=G me/Re²

g=9.8m/s²
me=5.98×10²⁴kg(mass of earth)
Re=6.38×10 ६ m(radius of earth)

G के मान में परिवर्तन

👉 विश्वत रेखा में जी का मान सबसे कम होता है।
👉 ध्रुवा में जी का मान सबसे अधिक होता है।
👉समुद्र तल से ऊपर या नीचे जाने पर gका मान घटता है।
👉यदि पृथ्वी का घूर्णन गति बढ़ता है तो g का मान घटेगा।
👉यदि पृथ्वी का घूर्णन गति घटता है तो g का मान बढ़ेगा।
👉चंद्रमा पर किसी वस्तु का भार पृथ्वी पर के भार का   1/6 होता है ।
👉पृथ्वी की तुलना में चंद्रमा का द्रव्यमान1/81 होता है।
👉पृथ्वी के केंद्र में जी का मान 0होता है।

लिफ्ट में किसी वस्तु का भार

👉जब लिफ्ट त्वरित गति से ऊपर की ओर जाता है तो व्यक्ति को अपना भार बढ़ा हुआ महसूस होता है।

👉जब लिफ्ट त्वरित गति से नीचे की ओर आता है तो व्यक्ति का भार में कमी महसूस होता है।

👉जब लिफ्ट एक समान वेग से ऊपर या नीचे जाता है तो उसके भार में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

👉यदि लिफ्ट का त्वरण गुरुत्व त्वरण से अधिक होता है तो उस में खड़ा व्यक्ति फर्श से उठकर छत पर  जा ने लगेगा।

👉यदि लिफ्ट के नीचे उतरते समय डोरी टूट जाए तो व्यक्ति का भार में कमी महसूस होगा।


कृत्रिम उपग्रह

कृतिम उपग्रह दो प्रकार के होते हैं।
1. कक्षीय उपग्रह
2.भू-स्थिर उपग्रह

कक्षीय उपग्रह-

कक्षीय उपग्रह का वेग8 km/sहोता है ।

👉कक्षीय उपग्रह का परिक्रमण काल84min होता है।
👉 यह ऊंचाई पर निर्भर करती है, अर्थात पृथ्वी के निकट चक्कर लगाने वाले उपग्रह का वेग अधिक होता है।
👉 यह द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है, एक ही कक्षा में  उपस्थित जिन भिन्न-भिन्न द्रव्यमान वाले उपग्रह का वेग समान होगा।

कक्षीय वेगv0=√G me/Re+h(orbital velocity)

भू- स्थिर उपग्रह-

वैसे उपग्रह जो पृथ्वी का एक चक्कर 24 घंटा में पूरा करता है उसे भूस्थिर उपग्रह करते हैं।

👉 पृथ्वी तल से उसकी ऊंचाई36000 होती है।

पलायन वेग(Escape velocity)

वह न्यूनतम वेग जिसमें किसी वस्तु को ऊपर की ओर फेंकने पर वह गुरुत्व क्षेत्र को पार कर जाता है जिसे पृथ्वी पर वापस नहीं आता है उस न्यूनतम वेग को पलायन वेग करते हैं।

VE=√²gRe

👉पृथ्वी के लिए पलायन वेग का मान11.2km/s होता है।
👉चंद्रमा के लिए पलायन वेग का मान2.37 km/sहोता है।
👉सौर मंडल के लिए पलायन वेग का मान 42km/sहोता। है।

#कक्षीय वेग और पलायन वेग में संबंध

👉यदि किसी उपग्रह का कक्षीय वेग को√2×41% बढ़ा दी जाए तो वह उपग्रह अपनी कक्षा से पलायन कर लेगी




सोमवार, 4 अक्टूबर 2021

chapter -5 physics कार्य, ऊर्जा एवं शक्ति


 

         chapter -5

                                                      कार्य, ऊर्जा एवं शक्ति

कार्य :-work



यदि किसी वस्तु पर f बल लगाया जाता है तो वस्तु s दूरी तक विस्थापित होती है और और यदि उसके बीच q कोण बनता हो तब

Formula
कार्य =बल ×विस्थापन

👉जब qका मान 90 डिग्री होता है तब कार्य शुन्य होता है।
👉 जब qका मान o°डिग्री होता है तो कार्य अनंत होता है।

ऊर्जा:-Energy



कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं।

ऊर्जा के प्रकार

१. गतिज ऊर्जा
२. स्थितिज ऊर्जा

👉 ऊर्जा का विमीय सूत्र [ML²T-²]

गतिज ऊर्जा:-

किसी वस्तु में उसकी गति के कारण जो उर्जा उत्पन्न होती है उसे गतिज ऊर्जा करते हैं।

जैसे :-
दौड़ता बालक

स्थितिज ऊर्जा:-

किसी वस्तु में उसकी स्थिति के कारण जो कार्य उत्पन्न होती है उसे स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।

जैसे:-
खींचा हुआ धनुष में संचित ऊर्जा
चाबी वाली घड़ी में संचित ऊर्जा
तलाब में जमा हुआ पानी

स्थितिज ऊर्जा =mgh
गतिज ऊर्जा=½mv²

👉 जब किसी वस्तु का वेग दोगुनी कर दिया जाए तो (k) गतिज ऊर्जा ( 4 गुनी) हो जाएगी तथा वेग को आधी करने पर गतिज ऊर्जा एक चौथाई हो जाएगी।

👉 गतिज ऊर्जा और संवेग में संबंध


गतिज ऊर्जा k.E=½mv²
                       =mv²/2×m/m
                       =m²v²/2m(p=mv)
                K.E=p²/2m

👉यदि किसी वस्तु का संवेग दोगुनी कर दिया जाए तो उसकी गतिज ऊर्जा 4 गुनी हो जाएगी।
👉किसी वस्तु का संवेग और वेग के अनुपात से (द्रव्यमान) मिलता है।

       P=mv
mv/v=m
         =संवेग/वेग

👉 ऊर्जा का SI मात्रक जूल(J)

शक्ति:-(Power)



कार्य करने की समय दर को शक्ति करते हैं।

P=w/t
   =J/sec

👉 शक्ति का SI मात्रक जूल/ सेकंड होता है।
       इसे watt से मापी जाती है।
👉 मशीनों की शक्ति को अश्वशक्ति से मापी जाती है।
1H.P=746 watt

शक्ति का विमीय सूत्र=[ML²T-³]
W=F×D
F=m.a
    =[m].[LT-²]
     =[MLT-²]

गुरुवार, 30 सितंबर 2021

सरल मशीन,उत्तोलक,आल॑ब,आयास,भार,यांत्रिक लाभ,उत्तोलक का सिद्धांत,प्रथम श्रेणी उत्तोलक,द्वितीय श्रेणी उत्तोलक,तृतीय श्रेणी उत्तोलक

 

Chapter- 4

                        सरल मशीन

सरल मशीन:-- सरल मशीन एक ऐसी युक्ति है जो हमारे कार्य को सुविधाजनक बनाने में सहायता करती है।
👉 यह बल -आघूर्ण के सिद्धांत पर कार्य करता है।


जैसे:-
उत्तोलक ( Lever)
गिरनी (pulley)
आनत तल(Inclined plane)
स्क्रु जैक(screw jack)

मशीन की दक्षता=मशीन द्वारा किया गया कार्य/मशीन को दी गई ऊर्जा  *100
👉 मशीन की दक्षता कभी भी 100% नहीं हो सकती।

उत्तोलक:-

यह एक सीधी छड़ है, जो किसी निश्चित बिंदु के ( आमने-सामने )इर्द-गिर्द आसानी पूर्वक घूम सकती है।

उत्तोलक के 3 मुख्य भाग हैं:-
1. आल॑ब(fulcrum)
2. आयास(effort)
3. भार(load)

आल॑ब :-

जिस निश्चित बिंदु के चारों और उत्तोलक की छड स्वतंत्रता पूर्वक घूम सकती है, उसे आलब कहते हैं।

आयास:-

उत्तोलक को उपयोग में लाने के लिए उस पर जो बल लगाया जाता है उसे आयास कहते हैं।

भार:-

उत्तोलक के द्वारा जो बोझ उठाया जाता है अर्थात किये गए कार्य को भार करते हैं।

उत्तोलक तीन प्रकार के होते हैं

१.प्रथम श्रेणी के उत्तोलक(1st class Lever)
२.द्वितीय श्रेणी के उत्तोलक (2nd class Lever)
३.तृतीय श्रेणी क उत्तोलके (3rd class Lever)

प्रथम श्रेणी उत्तोलक:-

यदि आलम्ब(f )आयास(E )और भार(L )के बीच में हो तो उसे 1st class Lever करते हैं।

यांत्रिक लाभ:-

उत्तोलक में भार एवं आयास के अनुपात को यांत्रिक लाभ कहते हैं।

यांत्रिक लाभ=भार/आयास

उत्तोलक  का सिद्धांत:-

आ्यास एवं आयास भुजा का गुणनफल भार एवं भार भुजा के गुणनफल के बराबर होती है।

भार *भार भुजा=आयास*आयास भुूजा

प्रथम श्रेणी उत्तोलक का यांत्रिक लाभ:-

यांत्रिक लाभ=आयास भुजा/भार भुजा
👉प्रथम श्रेणी उत्तोलक का यांत्रिक लाभ हमेशा एक के बराबर, एक से कम या एक से अधिक हो सकता है।

जैसे:-
तराजू ,कैंची ,प्लास, साइकिल का ब्रेक आदि।

द्वितीय श्रेणी उत्तोलक:-

जब भार आलम और आयास के बीच में हो तो उसे द्वितीय श्रेणी उत्तोलक कहते हैं।

यांत्रिक लाभ= आयास भुजा/भार भुजा

👉 द्वितीय श्रेणी उत्तोलक का यांत्रिक लाभ हमेशा एक से अधिक होता है।


जैसे:-
सरोता
ठेला गाड़ी आदि।

तृतीय श्रेणी उत्तोलक:-

जब आयास आलब और भार के बीच में होती है तो उसे तृतीय श्रेणी उत्तोलक करते हैं।

यांत्रिक लाभ =आयास भुजा /भार भुजा

👉तृतीय श्रेणी उत्तोलक का यांत्रिक लाभ हमेशा एक से कम होता है
जैसे:-
मनुष्य का हाथ
चिमटा
मछली पकड़ने का डंन्टा  आदि।


आवेग,अभिकेन्द्रीय बल,centripetal force,अपकेंद्रीय बल,कोणीय वेग,बल आघूर्ण part-2

आवेग :- जब किसी  वस्तु पर बल बहुत कम समय के लिए लगता है तो उस वस्तु मे लगने वाला बल और समय  अन्तराल के गुणनफल को  आवेग कहते हैं ा 

 आवेग=बल*समय  अन्तराल

S I मात्रक न्यूटन sec होता है ा part-2

सदिश राशि ा 

वीमय सूत्र[ M L T -1 ]

जैसे :-

*क्रिकेट खलाड़ी बोल को कैच करने के बाद अपने हाथों को नीचे कि और खीचते हैं ा 

*गाड़िया मे झटका को कम करने के लिए स्प्रिंग का प्रोयग किया जाता हैं ा 

अभिकेन्द्रीय बल :-centripetal force

जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ  मे घूमती हैं ,तो  केंद्र की और लगने वाला को अभिकेन्द्रीय बल कहते हैं ा 

अपकेंद्रीय बल:-

जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ में घूमती है तो केंद्र से बाहर की ओर लगने वाला बल को अपकेंद्रीय बल कहते हैं।

*दूध से क्रीम निकालने के लिए अपकेंद्र बल का प्रयोग किया जाता है।

कोणीय वेग:-

जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ में घूमती है तो 1 सेकंड में वृत्त के केंद्र के साथ जो कोण बनाता है कोणीय वेग कहलाता है।


कोणीय वेग=w=q/t


कोनिया वेग का मात्रक रेडियन सेकंड होता है।


रेखय वेग=कोणीय वेग*त्रिज्या

बल आघूर्ण :-


जब किसी वस्तु को किसी अक्ष के परिता घुमाया जाता है तो उसमें लगने वाला बल और लंबवत दूरी के गुणनफल को बल आघूर्ण कहते हैं।


                 T=f*d


👉एस आई मात्रक न्यूटन मीटर होता है।

👉सी ०जी ॰एस॰ मात्रक डायन सेंटीमीटर।

👉सदिश राशि।

👉विमीय सूत्र[ML²T-²]

chapter -14 प्रकाश किसे कहते हैं ,

  chapter -14   प्रकाश प्रकाश एक ऐसी बाहृय कारक है, जो किसी वस्तु को देखने में हमें सहायता करती। 👉 प्रकाश एक अनुप्रस्थ तरंग है। 👉 प्रकाश क...