शुक्रवार, 8 अक्टूबर 2021

Chapter -7 पृष्ठ तनाव (Surface Tension) physics

 

Chapter -7

     पृष्ठ तनाव (Surface Tension)
पृष्ठ तनाव:-द्रव का स्वतंत्र सत्ताह हमेशा तनाव में रहता है तथा कम से कम क्षेत्रफल घेरने की प्रवृत्ति होती है इससे पृष्ठ तनाव कहते हैं।

                   T=F/L
👉 इस का एसआई मात्रक N/M होता है।
👉 द्रव को गर्म करने पर उसका पृष्ठ तनाव कम हो जाता है। तथा क्रांतिक ताप(- 273°C)पर शून्य हो जाता है।

जैसे:-
1.वर्षा की बूंदे गोलाकार होना।

2.सेविंग ब्रश को पानी में डालने पर फैल जाता है तथा बाहर निकालने सिकुड़ जाता है।

3.साबुन या डिटर्जेंट गंदे कपड़े को साफ कर देता है।

4.गर्म सूप स्वादिष्ट लगते हैं।

ससंजक बल(Cnesive force)

एक ही पदार्थ के अणुओं के बीच लगने वाला बल ससंजक बल कहलाता है।


👉 ठोसों में ससजक बल का माप सबसे अधिक होता है।

आसंजक बल(Adhesive force)

दो भिन्न-भिन्न पदार्थ के अणुओं के बीच लगने वाला बल को आसंजक बल कहते हैं।

जैसे:-
ब्लैक बोर्ड में चौक से लिखने से अक्षर उभर जाते हैं, तथा पानी गिलास को भीगोता होता है।

केशिकत्व(Capillarity)

👉केशिकत्व नली में द्रव के ऊपर चढने या नीचे उतरने की घटना को केशिकत्व कहते हैं।

👉जो द्रव ग्लास को भिगोता है,वह केशनली म उपर चढ़ता है।


जैसे:- पानी

👉जो द्रव ग्लास भी नहीं भिगोता है वह केशनली में नीचे उतरता है।


जैसे:-
पारा

1. लालटेन या लैंम्प  में तेल का ऊपर चढ़ना।
2.ब्लाटिग  पेपर का स्याही को भोगना।

बुधवार, 6 अक्टूबर 2021

chapter -6 गुरुत्वाकर्षण (Gravitation)

 

chapter -6


गुरुत्वाकर्षण (Gravitation)

ब्रह्मण्ड मैं प्रत्येक वस्तु में एक प्रकार का  आकर्षण बल लगता है, जो दूसरे वस्तु को अपने और आकर्षित करता है उसे गुरुत्वाकर्षण कहते हैं।

*गुरुत्वाकर्षण का नियम को न्यूटन ने दिया था।

गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम

किन्हीं दो वस्तुओं के बीच लगने वाला आकर्षण बल वस्तुओं के द्रव्यमान के गुणनफल के समानुपाती होता है तथा  दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

m1_____r______m2
f£m1m2______(1)
f£.1/r²________(2)
f£m1m2/r²
F=Gm1m2/r²
G=6.67×10-¹¹Nm²/kg²

👉गुरुत्व बल -

पृथ्वी जिस बल से किसी वस्तु को अपने केंद्र की ओर खींचती है उसे गुरुत्व बल करते हैं।

👉 गुरुत्व त्वरण-
गुरुत्व बल के कारण जो त्वरण उत्पन्न होता है उसे गुरुत्व त्वरण करते हैं।

g=G me/Re²

g=9.8m/s²
me=5.98×10²⁴kg(mass of earth)
Re=6.38×10 ६ m(radius of earth)

G के मान में परिवर्तन

👉 विश्वत रेखा में जी का मान सबसे कम होता है।
👉 ध्रुवा में जी का मान सबसे अधिक होता है।
👉समुद्र तल से ऊपर या नीचे जाने पर gका मान घटता है।
👉यदि पृथ्वी का घूर्णन गति बढ़ता है तो g का मान घटेगा।
👉यदि पृथ्वी का घूर्णन गति घटता है तो g का मान बढ़ेगा।
👉चंद्रमा पर किसी वस्तु का भार पृथ्वी पर के भार का   1/6 होता है ।
👉पृथ्वी की तुलना में चंद्रमा का द्रव्यमान1/81 होता है।
👉पृथ्वी के केंद्र में जी का मान 0होता है।

लिफ्ट में किसी वस्तु का भार

👉जब लिफ्ट त्वरित गति से ऊपर की ओर जाता है तो व्यक्ति को अपना भार बढ़ा हुआ महसूस होता है।

👉जब लिफ्ट त्वरित गति से नीचे की ओर आता है तो व्यक्ति का भार में कमी महसूस होता है।

👉जब लिफ्ट एक समान वेग से ऊपर या नीचे जाता है तो उसके भार में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

👉यदि लिफ्ट का त्वरण गुरुत्व त्वरण से अधिक होता है तो उस में खड़ा व्यक्ति फर्श से उठकर छत पर  जा ने लगेगा।

👉यदि लिफ्ट के नीचे उतरते समय डोरी टूट जाए तो व्यक्ति का भार में कमी महसूस होगा।


कृत्रिम उपग्रह

कृतिम उपग्रह दो प्रकार के होते हैं।
1. कक्षीय उपग्रह
2.भू-स्थिर उपग्रह

कक्षीय उपग्रह-

कक्षीय उपग्रह का वेग8 km/sहोता है ।

👉कक्षीय उपग्रह का परिक्रमण काल84min होता है।
👉 यह ऊंचाई पर निर्भर करती है, अर्थात पृथ्वी के निकट चक्कर लगाने वाले उपग्रह का वेग अधिक होता है।
👉 यह द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है, एक ही कक्षा में  उपस्थित जिन भिन्न-भिन्न द्रव्यमान वाले उपग्रह का वेग समान होगा।

कक्षीय वेगv0=√G me/Re+h(orbital velocity)

भू- स्थिर उपग्रह-

वैसे उपग्रह जो पृथ्वी का एक चक्कर 24 घंटा में पूरा करता है उसे भूस्थिर उपग्रह करते हैं।

👉 पृथ्वी तल से उसकी ऊंचाई36000 होती है।

पलायन वेग(Escape velocity)

वह न्यूनतम वेग जिसमें किसी वस्तु को ऊपर की ओर फेंकने पर वह गुरुत्व क्षेत्र को पार कर जाता है जिसे पृथ्वी पर वापस नहीं आता है उस न्यूनतम वेग को पलायन वेग करते हैं।

VE=√²gRe

👉पृथ्वी के लिए पलायन वेग का मान11.2km/s होता है।
👉चंद्रमा के लिए पलायन वेग का मान2.37 km/sहोता है।
👉सौर मंडल के लिए पलायन वेग का मान 42km/sहोता। है।

#कक्षीय वेग और पलायन वेग में संबंध

👉यदि किसी उपग्रह का कक्षीय वेग को√2×41% बढ़ा दी जाए तो वह उपग्रह अपनी कक्षा से पलायन कर लेगी




सोमवार, 4 अक्टूबर 2021

chapter -5 physics कार्य, ऊर्जा एवं शक्ति


 

         chapter -5

                                                      कार्य, ऊर्जा एवं शक्ति

कार्य :-work



यदि किसी वस्तु पर f बल लगाया जाता है तो वस्तु s दूरी तक विस्थापित होती है और और यदि उसके बीच q कोण बनता हो तब

Formula
कार्य =बल ×विस्थापन

👉जब qका मान 90 डिग्री होता है तब कार्य शुन्य होता है।
👉 जब qका मान o°डिग्री होता है तो कार्य अनंत होता है।

ऊर्जा:-Energy



कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं।

ऊर्जा के प्रकार

१. गतिज ऊर्जा
२. स्थितिज ऊर्जा

👉 ऊर्जा का विमीय सूत्र [ML²T-²]

गतिज ऊर्जा:-

किसी वस्तु में उसकी गति के कारण जो उर्जा उत्पन्न होती है उसे गतिज ऊर्जा करते हैं।

जैसे :-
दौड़ता बालक

स्थितिज ऊर्जा:-

किसी वस्तु में उसकी स्थिति के कारण जो कार्य उत्पन्न होती है उसे स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।

जैसे:-
खींचा हुआ धनुष में संचित ऊर्जा
चाबी वाली घड़ी में संचित ऊर्जा
तलाब में जमा हुआ पानी

स्थितिज ऊर्जा =mgh
गतिज ऊर्जा=½mv²

👉 जब किसी वस्तु का वेग दोगुनी कर दिया जाए तो (k) गतिज ऊर्जा ( 4 गुनी) हो जाएगी तथा वेग को आधी करने पर गतिज ऊर्जा एक चौथाई हो जाएगी।

👉 गतिज ऊर्जा और संवेग में संबंध


गतिज ऊर्जा k.E=½mv²
                       =mv²/2×m/m
                       =m²v²/2m(p=mv)
                K.E=p²/2m

👉यदि किसी वस्तु का संवेग दोगुनी कर दिया जाए तो उसकी गतिज ऊर्जा 4 गुनी हो जाएगी।
👉किसी वस्तु का संवेग और वेग के अनुपात से (द्रव्यमान) मिलता है।

       P=mv
mv/v=m
         =संवेग/वेग

👉 ऊर्जा का SI मात्रक जूल(J)

शक्ति:-(Power)



कार्य करने की समय दर को शक्ति करते हैं।

P=w/t
   =J/sec

👉 शक्ति का SI मात्रक जूल/ सेकंड होता है।
       इसे watt से मापी जाती है।
👉 मशीनों की शक्ति को अश्वशक्ति से मापी जाती है।
1H.P=746 watt

शक्ति का विमीय सूत्र=[ML²T-³]
W=F×D
F=m.a
    =[m].[LT-²]
     =[MLT-²]

गुरुवार, 30 सितंबर 2021

सरल मशीन,उत्तोलक,आल॑ब,आयास,भार,यांत्रिक लाभ,उत्तोलक का सिद्धांत,प्रथम श्रेणी उत्तोलक,द्वितीय श्रेणी उत्तोलक,तृतीय श्रेणी उत्तोलक

 

Chapter- 4

                        सरल मशीन

सरल मशीन:-- सरल मशीन एक ऐसी युक्ति है जो हमारे कार्य को सुविधाजनक बनाने में सहायता करती है।
👉 यह बल -आघूर्ण के सिद्धांत पर कार्य करता है।


जैसे:-
उत्तोलक ( Lever)
गिरनी (pulley)
आनत तल(Inclined plane)
स्क्रु जैक(screw jack)

मशीन की दक्षता=मशीन द्वारा किया गया कार्य/मशीन को दी गई ऊर्जा  *100
👉 मशीन की दक्षता कभी भी 100% नहीं हो सकती।

उत्तोलक:-

यह एक सीधी छड़ है, जो किसी निश्चित बिंदु के ( आमने-सामने )इर्द-गिर्द आसानी पूर्वक घूम सकती है।

उत्तोलक के 3 मुख्य भाग हैं:-
1. आल॑ब(fulcrum)
2. आयास(effort)
3. भार(load)

आल॑ब :-

जिस निश्चित बिंदु के चारों और उत्तोलक की छड स्वतंत्रता पूर्वक घूम सकती है, उसे आलब कहते हैं।

आयास:-

उत्तोलक को उपयोग में लाने के लिए उस पर जो बल लगाया जाता है उसे आयास कहते हैं।

भार:-

उत्तोलक के द्वारा जो बोझ उठाया जाता है अर्थात किये गए कार्य को भार करते हैं।

उत्तोलक तीन प्रकार के होते हैं

१.प्रथम श्रेणी के उत्तोलक(1st class Lever)
२.द्वितीय श्रेणी के उत्तोलक (2nd class Lever)
३.तृतीय श्रेणी क उत्तोलके (3rd class Lever)

प्रथम श्रेणी उत्तोलक:-

यदि आलम्ब(f )आयास(E )और भार(L )के बीच में हो तो उसे 1st class Lever करते हैं।

यांत्रिक लाभ:-

उत्तोलक में भार एवं आयास के अनुपात को यांत्रिक लाभ कहते हैं।

यांत्रिक लाभ=भार/आयास

उत्तोलक  का सिद्धांत:-

आ्यास एवं आयास भुजा का गुणनफल भार एवं भार भुजा के गुणनफल के बराबर होती है।

भार *भार भुजा=आयास*आयास भुूजा

प्रथम श्रेणी उत्तोलक का यांत्रिक लाभ:-

यांत्रिक लाभ=आयास भुजा/भार भुजा
👉प्रथम श्रेणी उत्तोलक का यांत्रिक लाभ हमेशा एक के बराबर, एक से कम या एक से अधिक हो सकता है।

जैसे:-
तराजू ,कैंची ,प्लास, साइकिल का ब्रेक आदि।

द्वितीय श्रेणी उत्तोलक:-

जब भार आलम और आयास के बीच में हो तो उसे द्वितीय श्रेणी उत्तोलक कहते हैं।

यांत्रिक लाभ= आयास भुजा/भार भुजा

👉 द्वितीय श्रेणी उत्तोलक का यांत्रिक लाभ हमेशा एक से अधिक होता है।


जैसे:-
सरोता
ठेला गाड़ी आदि।

तृतीय श्रेणी उत्तोलक:-

जब आयास आलब और भार के बीच में होती है तो उसे तृतीय श्रेणी उत्तोलक करते हैं।

यांत्रिक लाभ =आयास भुजा /भार भुजा

👉तृतीय श्रेणी उत्तोलक का यांत्रिक लाभ हमेशा एक से कम होता है
जैसे:-
मनुष्य का हाथ
चिमटा
मछली पकड़ने का डंन्टा  आदि।


आवेग,अभिकेन्द्रीय बल,centripetal force,अपकेंद्रीय बल,कोणीय वेग,बल आघूर्ण part-2

आवेग :- जब किसी  वस्तु पर बल बहुत कम समय के लिए लगता है तो उस वस्तु मे लगने वाला बल और समय  अन्तराल के गुणनफल को  आवेग कहते हैं ा 

 आवेग=बल*समय  अन्तराल

S I मात्रक न्यूटन sec होता है ा part-2

सदिश राशि ा 

वीमय सूत्र[ M L T -1 ]

जैसे :-

*क्रिकेट खलाड़ी बोल को कैच करने के बाद अपने हाथों को नीचे कि और खीचते हैं ा 

*गाड़िया मे झटका को कम करने के लिए स्प्रिंग का प्रोयग किया जाता हैं ा 

अभिकेन्द्रीय बल :-centripetal force

जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ  मे घूमती हैं ,तो  केंद्र की और लगने वाला को अभिकेन्द्रीय बल कहते हैं ा 

अपकेंद्रीय बल:-

जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ में घूमती है तो केंद्र से बाहर की ओर लगने वाला बल को अपकेंद्रीय बल कहते हैं।

*दूध से क्रीम निकालने के लिए अपकेंद्र बल का प्रयोग किया जाता है।

कोणीय वेग:-

जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ में घूमती है तो 1 सेकंड में वृत्त के केंद्र के साथ जो कोण बनाता है कोणीय वेग कहलाता है।


कोणीय वेग=w=q/t


कोनिया वेग का मात्रक रेडियन सेकंड होता है।


रेखय वेग=कोणीय वेग*त्रिज्या

बल आघूर्ण :-


जब किसी वस्तु को किसी अक्ष के परिता घुमाया जाता है तो उसमें लगने वाला बल और लंबवत दूरी के गुणनफल को बल आघूर्ण कहते हैं।


                 T=f*d


👉एस आई मात्रक न्यूटन मीटर होता है।

👉सी ०जी ॰एस॰ मात्रक डायन सेंटीमीटर।

👉सदिश राशि।

👉विमीय सूत्र[ML²T-²]

मंगलवार, 28 सितंबर 2021

physics गति के नियम (newton 's low of motion )न्यूटन का प्रथम नियम ,जडत्व , गति जडत्व, विराम जडत्व ,संवेग , न्यूटन का दितीय नियम,न्यूटन का तृतीय नियमpart- 1

physics  गति के नियम (newton 's low  of  motion )

न्यूटन  ने गति के नियम को सबसे पहले सर आइजक न्यूटन ने सन 1687 ई०  मे प्रिंसीपिया  नामक पुस्तक मे प्रकासित किया था  ा 

न्यूटन का प्रथम नियम :- यदि कोई वस्तु गति के अवस्ता मे हो वह गति मे हि रहेगी ओर यदि कोई वस्तु विराम अवस्था मे  हो तो विराम मे हि रहेगी ,जब तक कि बाहरी बल नहीं लग जाय ा

* न्यूटन का  प्रथम नियम से बल का परिभाषा मिलता हैंा  

*न्यूटन का  प्रथम नियम को जडत्व का नियम भी कहते  हैंा     

*जडत्व का नियम को गैंलेलियो ने दिया था   

जडत्व  :- किसी वस्तु के सवता(अपने आप )परिवर्तन न होने कि घटना को  जडत्व कहते हैं ा 

जडत्व के  दो प्रकार 
1.  गति जडत्व 
2 . विराम  जडत्व

 गति जडत्व :-

किसी वस्तु मे गति के कारण उत्पन  जडत्व कहते हैं ा 
जैसे :-
जब चलती हुई रेल गाड़ी अचानक रूकती हैं, तो व्यक्ति  का आगे की ओर झुकना ा  
जब चलती हुई रेल गाड़ी से व्यक्ति उतरता हैं ,तो व्यक्ति का धरती पर गिरना ा 

  विराम  जडत्व :-

किसी  वस्तु मे विराम के कारण उत्पन  विराम  जडत्व को विराम जडत्व कहते हैं ा 
जैसे :-
जब रेलगाड़ी अचनाक खुलती हैं ,तो व्यक्ति का पीछे कि ओर झुकना ा 
कांच की खिड़की मे गोली मारने से सिर्फ छेद होती हैं ,लेकिन पथर मारने से चकनाचूर हो जाती हैं ा 
घोड़ा के अचानक चलने से अश्वरोही  का पीछे कि ओर झुकना ा 

संवेग :- किसी गतिसील वस्तु का द्रवमान और वेग के गुणनफल को संवेग कहते है ा 

संवेग =द्रव्यमान *वेग 
s i  मात्रक kg -m /sec 
सदिश राशि 
विमीय सूत्र [MLT _1 ]
*यदि किसी वस्तु का वेग दुगुनी कर दिया जाए तो लागए गए बल समानुपाती होता हैं ा 

न्यूटन का दितीय नियम :-

संवेग परिवर्त्तन कि दर लागए गए बल का समानुपाती होता हैं ा 
*न्यूटन का  दितीय नियम से बल का व्यंजक FORMULA मिलता हैं ा 

न्यूटन का तृतीय  नियम :-

प्रत्येक क्रिया के बराबर एवं विपरीत दिशा मे प्रतिक्रया होता हैं उसे न्यूटन का  तृतीय  नियम कहते हैं ा 
जैसे :-
1.  आदमी का चलना 
2.  नदी मे तैरना 
3.  बंदूक से गोली दागने पर बंदूक का पीछे की और लौटना ा 

बल :-

बल एक बाह्यय कारक है ,जो किसी वस्तु मे लगकर उसके अवस्था को परिवर्तन करता है ,या परिवर्तन लगाने कि कोसिश करता है ा 
बल =द्रव्यमान *त्वरण 
S I मात्रक kg -m /sec  2 
c . g.  s  मात्रक dyne 
1 न्यूटन =10   5dyne 
m . k . s -kg  m /sec 2 
बल एक सदिश राशि है ा 
बल का विमय  सूत्र  M l T -2 


 

 


 

मंगलवार, 14 सितंबर 2021

गति ( MOTION )

                                          गति   ( MOTION )

दूरी :- किसी वस्तु  द्वारा तय कि गई वास्तविक लम्बाई को दूरी कहते हैं ा 

👉S I  मात्रक मीटर 

 👉अदिश राशि 

👉विमीय सूत्र[ M ० L' T ०]  

👉+ve 


विस्थापन :- दो बिंदुओ  के बीच की  न्यूनतम दूरी क़ो विस्थापन कहते  हैं ा 

👉S I मात्रक मीटर 

👉 सदिश राशि 

👉विमीय सूत्र[ M०  L' T ०]

👉+ve ,-ve या शून्य  


चाल :- एकांक समय मे वस्तु द्वारा तय किया गया दूरी को चाल कहते हैं ा 

                                चाल =दूरी / समय 

👉S I मात्रक m /sec 

👉अदिश राशि

 👉M० LT -1

 👉 इसका दिशा नश्चित नहीं होता हैं ा 


वेग :- किसी निश्चित दिशा मे वस्तु द्वारा तय कि गई विस्थापन को वेग कहते हैं ा 

                               वेग =विस्थापन /समय 

👉S I मात्रक m /sec

👉सदिश राशि 

👉 विमीय सूत्र [M ० L1  T-1  ]

👉इसका दिशा निश्चित होता हैं ा 


त्वरण :- वेग परिवर्तन कि दर को त्वरण कहते हैं  ा    

                     त्वरण =वेग मे परिवर्तन /समय 

👉a =v -u /t 

👉SI मात्रक m /sec2 

👉इसका विमीय  सूत्र [M० L1T-2] 


मंदन :- जब त्वरण ऋररात्मक हों तो उसे मंदन कहते हैं ा

👉  -m /sec2  

                                     गति के समीकरण 

                                         1. v =u +at 

                                         2. v2 =u2+2as

                                         3. s =ut+1/2 at2 

                                         4. s nth=u +1 /2 a (2n -1 )  


औसत चाल =वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी /कुल समय 


1. एक वस्तु विरामावास्था मे 10m /s2 के त्वरण से चल रही है तो 5sec मे कितनी दूरी तय करेगी ा

u =0 m /sec 

a =10 m /sec2  

t =5sec 

s =?

s =ut +1 /2 at2  

=0*5 +1 /2 *10 *5 *5 

=०+125 

=125 m   

 2.एक ट्रैन 90 km /h कि चाल से चल रही है ब्रेक लगाने  पर उसमे -0. 5 m /sec 2 का एक समान त्वरणा  उत्पान होता है ,रुकने के पहिले वह कितने दूरी तय करे गा  ा

u =90 km /h 

v =0 m /sec 

a = -0.5 m /sec2

s =? 

v 2 =u 2 +2 as 

=(25)2 +2 *-0.5/10  *s 

=625 -s 

s =625 

3. एक कार विरामअवास्था से 4 m /sec 2 के त्वरणसे चलना प्रारंभ करती है ,10ses मे कितने दूरी तय केरगा ा 

u =0 m /sec 

a =4 m /sec 2 

t =10 sec 

s =?

s =ut +1 /2 at2 

=0 *10 +1 /2 *4 *10 

=०+200 

=200 m 

4. एक पिंड समान त्वरण के साथ चल रहा है ,एक समय पर इसका वेग 10m /sec2 है ,5sec के बाद इसका वेग 20 m /secहो जाता है ,तो त्वरण  ज्ञात  करे ा

u =10 m /sec 

v =20 m /sec 

a =?

a =v -u /t 

=20 -10 /5 

=10 /5 

=2 

5. एक वस्तु विरामअवस्था से चलना  अंरभ करती है  उस पर एक समान त्वरण कार्य करता है वह 5 वे sec मे 9m कि दूरी तय करता है तो त्वरण ज्ञात करे ा

u =0m /s

 n=5 th 

s nth = 9 m 

a =?

s n th =u +1 /2 a *(2n -1 )

9 =0 +1 /2 a *(2 .5 -1)

9 =0 +1 /2 a *9 

a =2 m /sec    

6.एक वस्तु 16m कि दूरी 4sec मे तय करती है ,पुनः बाद कि 16m कि दूरी 2sec मे तय करता है ,तो वस्तु का आौसत चाल किया होगा ा

ओेसत    चाल  =  वस्तु द्वारा तय किया गया कुल दूरी /कुल समय 

                      =32 /6 

                      =5. 3 m /sec 

7 . किसी कार पर ब्रेक लगाने पर 6m /sec 2 मंदन उत्पन होता है ,यदि कर ब्रेक लगाने के बाद 2sec मे रूक जाता है ,तब इस अंतराल मे तय किया गया दूरी किया होगा ा 

v =0 

a =6 m /sec 

t =2sec 

s =?

a =v -u /t 

-6 =0 -u /2 

-12 =0 -u  

u  =12 

s =at +1 /2 *at 2 

  =12 *२+1 /2 *6 *4 

  = 12 *2 +1 /2 *6 *4 

  =24 +(-१२)

 =12 m /sec 




 




 




chapter -14 प्रकाश किसे कहते हैं ,

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